Breaking
गढ़वा पलामू न्यूज़ ब्यूरो — ताज़ा और निष्पक्ष खबरें...गढ़वा पलामू न्यूज़ ब्यूरो — ताज़ा और निष्पक्ष खबरें...
NR Global News
development

गढ़वा शहर में गहराता जल संकट: नल में हवा और बाल्टी में इंतज़ार, पाइपलाइन योजना पर उठे सवाल

रविवार, 12 अप्रैल 2026
garhwa
By NR Desk

गर्मियों के दस्तक देते ही गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के 10 से अधिक वार्डों में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। सरकार की करोड़ों की जलापूर्ति योजना कागजों पर तो सफल है, लेकिन ज़मीन पर नल सूखे पड़े हैं। देखिए हमारी विस्तृत पड़ताल।

गढ़वा शहर के वार्ड संख्या 12, 14 और 19 के निवासी इन दिनों अपनी रातों की नींद खराब कर रहे हैं। वजह कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक बाल्टी पानी की तलाश है। जैसे-जैसे पारा 44 डिग्री को छू रहा है, शहर की प्यास बुझाने के प्रशासन के तमाम दावे दम तोड़ रहे हैं। गढ़वा शहर में जलापूर्ति के लिए बनाई गई योजना भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ती नज़र आ रही है।

ज़मीनी हकीकत:
दानरो नदी से पानी खींचने वाली मुख्य पाइपलाइन में आए दिन लीकेज की खबरें आती हैं। पिछले 10 दिनों से शहर के मुख्य टैंक से पानी की सप्लाई बाधित है। लोग सुबह 4 बजे से ही सार्वजनिक चापाकालों और कुओं पर कतारों में खड़े हो जाते हैं। रंका रोड की रहने वाली विमला देवी कहती हैं, "नल तो लगे हैं लेकिन उनमें केवल हवा आती है। हमें निजी टैंकरों से 500 से 800 रुपये देकर पानी खरीदना पड़ रहा है। गरीब आदमी प्यासा रहे या पैसा बचाए?"

करोड़ों की योजना, फिर भी संकट:
नगर विकास विभाग द्वारा गढ़वा जलापूर्ति योजना पर पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। नए टैंक बने, मील लम्बी पाइपलाइन बिछी, लेकिन सिस्टम की बनावट में ऐसी खामियां रह गईं कि ऊंचाई वाले इलाकों तक पानी पहुँच ही नहीं पाता। कई जगहों पर पाइपलाइन अवैध रूप से काटी गई है या फिर उसमें कचरा जमा है।

प्रशासन और राजनीति:
नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि बिजली की समस्या और पुरानी मोटरों के जलने के कारण सप्लाई में दिक्कत आ रही है। वहीं, स्थानीय राजनीतिज्ञ एक-दूसरे पर दोषारोपण करने में व्यस्त हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि पाइपलाइन बिछाने में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। डीसी ने आदेश दिया है कि सुबह-शाम टैंकरों के माध्यम से उन इलाकों में पानी भेजा जाए जहां किल्लत ज़्यादा है, लेकिन 80 हजार की आबादी के लिए 5 टैंकर नाकाफी हैं।

भविष्य का खतरा:
भूजल का स्तर हर साल 3 से 5 फीट नीचे जा रहा है। अगर समय रहते वाटर हार्वेस्टिंग और जलापूर्ति योजना की तकनीकी खामियों को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले सालों में स्थिति विस्फोटक हो सकती है। लोग अब नगर परिषद कार्यालय के घेराव की तैयारी कर रहे हैं। प्यास की यह चिंगारी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

निष्कर्ष और समाधान:
पेयजल संकट केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, यह मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा है। एनआर डेली न्यूज़ प्रशासन से मांग करता है कि वे वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर वार्डों का दौरा करें और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें। शहर के हर नागरिक को उसके हक का पानी मिलना ही चाहिए।

N
Authenticated Agent

NR Bureau Member

NR Bureau is a senior intelligence correspondent for NR Global Agency, specializing in regional geopolitical developments and sociopolitical analysis.

System Related Archives