गढ़वा का कांडी क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से एक खज़ाना साबित हो रहा है। हाल ही में स्थानीय गुफाओं में आदिमानव द्वारा बनाए गए दुर्लभ शैलचित्र (Petroglyphs) मिले हैं, जो हज़ारों साल पुराने होने का संकेत दे रहे हैं।
झारखंड की धरती के गर्भ में न केवल खनिज, बल्कि हज़ारों साल का इतिहास भी छिपा है। गढ़वा जिले के कांडी और मझिआंव प्रखंड की पहाड़ियों के बीच कुछ ऐसी गुफाएं मिली हैं, जिनके अंदर की दीवारों पर लाल रंग के अजीबोगरीब चित्र अंकित हैं। स्थानीय चरवाहों द्वारा देखे गए ये चित्र अब शोधकर्ताओं के लिए कौतूहल का विषय बन गए हैं। एनआर डेली न्यूज़ की विशेष पुरातात्विक रिपोर्ट।
क्या दर्शाते हैं ये शैलचित्र?
गुफाओं की दीवारों पर शिकार करते हुए इंसानों, जानवरों (हाथी, घोड़े, हिरण) और कुछ ज्यामितीय आकृतियों के चित्र हैं। विशेषज्ञों का प्राथमिक अनुमान है कि ये चित्र पाषाण काल (Stone Age) या उसके बाद के हो सकते हैं। चित्रों में इस्तेमाल किया गया प्राकृतिक लाल रंग आज भी जस का तस है, जो उस समय की उन्नत कलाकारी का प्रमाण है। यह भीमबेटका (मध्य प्रदेश) की गुफाओं की याद दिलाता है।
उपेक्षा का शिकार विरासत:
दुख की बात यह है कि यह स्थल आज भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के मानचित्र पर नहीं है। स्थानीय लोग इन गुफाओं में खाना बनाते हैं या फिर पत्थरों पर अपना नाम लिखकर इस अनमोल विरासत को नष्ट कर रहे हैं। जागरूकता के अभाव में कई महत्वपूर्ण शैलचित्र पहले ही मिट चुके हैं। अगर जल्द ही घेराबंदी नहीं की गई, तो हम अपने पूर्वजों की यह आखिरी निशानी भी खो देंगे।
पर्यटन और शोध की संभावनाएं:
अगर इन गुफाओं को संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो यहाँ शोधार्थियों और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ सकती है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोज़गार बढ़ेगा, बल्कि दुनिया को गढ़वा के ऐतिहासिक महत्व के बारे में पता चलेगा। स्थानीय ऐतिहासिक सोसायटी ने मांग की है कि इन चित्रों की कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) कराई जाए ताकि इनकी सटीक उम्र का पता चल सके।
जनता की भूमिका:
प्रशासन के भरोसे रहने के बजाय स्थानीय ग्रामीणों को भी अपनी इस विरासत की रक्षा करनी होगी। हमें यह समझना होगा कि ये पत्थर बेज़ुबान नहीं हैं, ये हमारी जड़ों की कहानी कहते हैं। एनआर डेली न्यूज़ की अपील है कि अगर आपको अपने आसपास ऐसी कोई प्राचीन कलाकृति या गुफा मिले, तो उसे नुकसान न पहुँचाएं और तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।
निष्कर्ष:
इतिहास ही भविष्य की नींव रखता है। कांडी के ये शैलचित्र यह साबित करते हैं कि गढ़वा आदिकाल से ही मानव सभ्यता का केंद्र रहा है। एनआर डेली न्यूज़ राज्य सरकार से पुरज़ोर मांग करता है कि वे इस क्षेत्र को 'हेरिटेज ज़ोन' घोषित करें और यहाँ उत्खनन कार्य शुरू कराएं। अपनी पहचान को बचाना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
