गढ़वा के एक छोटे से गांव की सरपंच सुमन देवी ने पुरुष प्रधान समाज की बेड़ियों को तोड़ते हुए अपनी पंचायत में जो विकास कार्य किए हैं, उनकी चर्चा आज पूरे झारखंड में हो रही है। शिक्षा और स्वच्छता उनके मुख्य हथियार बने।
जब सुमन देवी (34) पहली बार सरपंच चुनी गई थीं, तो लोगों ने कहा था कि असल में तो उनके पति ही राज करेंगे। लेकिन आज, सुमन देवी ने अपनी कार्यशैली से उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। उन्होंने न केवल अपने गांव के विकास का खाका खुद खींचा, बल्कि उसे ज़मीन पर उतारने के लिए अधिकारियों से लोहा भी लिया। एनआर डेली न्यूज़ की विशेष 'शक्ति' रिपोर्ट में आज एक महिला नेतृत्व की प्रेरक कहानी।
स्वच्छता से क्रांति:
सुमन का पहला कदम अपने गांव को ओडीएफ (Open Defecation Free) बनाना था। उन्होंने घर-घर जाकर महिलाओं को समझाया और सरकारी बजट का सही उपयोग सुनिश्चित किया। आज उनके गांव की हर गली पक्की है और वहां सौर ऊर्जा से चलने वाली लाइटें लगी हैं। गांव में घुसते ही आपको फूलों की क्यारियां और साफ-सुथरे डस्टबिन नज़र आएंगे। "स्वच्छता केवल शरीर की नहीं, सोच की भी होनी चाहिए," सुमन आत्मविश्वास से कहती हैं।
शिक्षा और डिजिटल साक्षरता:
सुमन ने महसूस किया कि गांव के बच्चे डिजिटल दुनिया में पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने पंचायत भवन के एक हिस्से को 'डिजिटल लाइब्रेरी' में बदल दिया। वहाँ दो पुराने कंप्यूटर ठीक करवाकर लगाए गए हैं और वाई-फाई की सुविधा दी गई है। उन्होंने स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'अभिभावक-सरपंच समिति' बनाई है। अब स्कूल में 95% उपस्थिति रहती है।
जल संरक्षण का मॉडल:
सूखे की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने मनरेगा के तहत पुराने तालाबों का सौंदर्यीकरण कराया और चेक डैम बनवाए। इस तकनीकी छोटे से बदलाव से गांव का जलस्तर 10 फीट ऊपर आया है। किसान अब साल में दो फसलें ले पा रहे हैं। सुमन के इस 'वाटर मॉडल' को देखने के लिए पड़ोसी जिलों के अधिकारी भी आते हैं।
महिला सशक्तिकरण:
सुमन ने गांव में महिलाओं के लिए छोटे कुटीर उद्योग जैसे पापड़ बनाना और सिलाई केंद्र शुरू करवाए हैं। वे कहती हैं, "जब महिला के पास खुद का पैसा होता है, तो घर में उसकी इज़्ज़त और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।" उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है और गांव में पिछले तीन सालों में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ है।
निष्कर्ष:
सुमन देवी जैसी महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि ज़मीनी लोकतंत्र अगर सही हाथों में हो, तो चमत्कार हो सकता है। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा 'आदर्श सरपंच' का पुरस्कार भी मिल चुका है। एनआर डेली न्यूज़ सुमन देवी के जज़्बे को सलाम करता है। अगर हर पंचायत को ऐसी मुखर और ईमानदार सुमन मिल जाए, तो भारत के गांवों की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी।
