मानसून आने को है और इसके साथ ही सोन, उत्तरी कोयल और दानरो नदी में जलस्तर बढ़ने का खतरा भी। क्या इस बार बाढ़ नियंत्रण की तैयारियां कागजों से बाहर निकलकर ज़मीन पर दिखेंगी? हमारी विशेष पड़ताल।
गढ़वा जिला एक ओर जहां सूखे का दंश झेलता है, वहीं मानसून के दौरान सोन और उत्तर कोयल नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लिए तबाही का संदेश लेकर आता है। पिछले साल हुई भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। इस वर्ष प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए क्या रणनीतियां बनाई हैं? एनआर डेली न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट।
अति संवेदनशील क्षेत्र:
कंडी, केतार और बड़गड़ के कई ग्रामीण इलाके 'रेड ज़ोन' में आते हैं। यहाँ हर साल नदियों का कटान (Erosion) उपजाऊ ज़मीन को लील जाता है। "नदी का पानी हमारे घरों की दहलीज़ तक पहुँच जाता है, पर प्रशासन केवल चूना छिड़क कर चला जाता है। हमें पक्के बांध की ज़रूरत है," चिनिया के ग्रामीण सहेन्द्र खरवार बताते हैं।
प्रशासनिक तैयारी:
ज़िला आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि उन्होंने राहत शिविरों और नावों की व्यवस्था कर ली है। जिला मुख्यालय में 24/7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, उन क्षेत्रों में तटबंधों (Embankments) की मरम्मत कराई जा रही है जहां रिसाव का खतरा है। स्थानीय गोताखोरों की सूची तैयार की गई है और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम से भी संपर्क बनाए रखा गया है।
कृषि पर प्रभाव:
बाड़ केवल घरों को नहीं उजाड़ती, वह खरीफ की फसलों को भी बर्बाद कर देती है। पिछले वर्ष बाढ़ के कारण धान की 40% फसल नष्ट हो गई थी। कृषि विभाग ने इस बार जल-जमाव वाले क्षेत्रों में कम समय वाली और पानी झेलने वाली किस्मों के बीज वितरित किए हैं। लेकिन सिंचाई और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई न होने से शहर के अंदर भी 'कृत्रिम बाढ़' (Urban Flooding) का खतरा बना हुआ है।
बुनियादी ढांचे की कमी:
ग्रामीण इलाकों में ऊंचे स्थानों पर 'शरण स्थल' (Shelter Homes) की भारी कमी है। बाढ़ के दौरान लोगों को अपने मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे या ऊंचे बांधों पर रहना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि वह स्कूलों और सामुदायिक भवनों को पहले से ही स्टॉक और दवाई के साथ तैयार रखे।
निष्कर्ष:
आपदा को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर तैयारी से नुकसान कम किया जा सकता है। प्रशासन को केवल आदेश जारी करने के बजाय ज़मीनी स्तर पर काम करना होगा। एनआर डेली न्यूज़ तटीय क्षेत्रों के निवासियों से अपील करता है कि वे सतर्क रहें और प्रशासन की चेतावनी का पालन करें। सुरक्षा सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
